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State Level Project Bal Salah of Haryana State Child Welfare Council
Posted on 28/11/2025
खण्ड के महृषि जमदग्नि राजकीय कन्या महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना एवं नशा विरोधी नियंत्रण जागरूकता प्रकोष्ठ के सौजन्य से हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की राज्य स्तरीय परियोजना बाल सलाह, परामर्श एवं कल्याण केन्द्रों की स्थापना के तत्वावधान में आज महाविद्यालय में अध्ययनरत युवा छात्राओं के लिए तनाव प्रबंधन के लिए भावनाओं को समझना : महिलाओं पर तम्बाकू और अन्य नशीले पदार्थों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्यवक्ता मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने संबोधित करते हुए कहा कि युवावस्था के दौरान विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, विभिन्न तनावों से ग्रस्त किशोर स्वयं से नशे की लत में जकड़े जाते हैं । किसी भी तरह के व्यसन से ख़ुद को बचाए रखना भी आधुनिक समाज में एक चुनौती है । दुखद पहलू यह है कि किशोरियाँ व महिलाएँ भी नशे की लत में फँसती जा रही है, नशा या लत चाहे कैसी भी हो अत्यधिक निर्भरता से बढ़ती है, फिर वो चाहे किसी पदार्थ जैसे शराब, सिगरेट, ड्रग्स इत्यादि या फिर किसी तरह का व्यवहार जैसे झूठ बोलना, चोरी करना, जुआ खेलना और डिजिटल युग में इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग शारीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है । पहली बार नशा करने पर डोपामाइन हॉर्मोन की वजह से जिसे फ़ील गुड न्यूरो ट्रांसमीटर भी कहते है ख़ुशी महसूस होती है, अच्छा लगने लगता है, बस उसी लहर के पीछे भागते हुए इन्सान किसी भी तरह के नशे की लत का शिकार हो जाता है । ताज़ा सर्वे बताते हैं कि भारत में क़रीब 14.2% महिलाएँ तंबाकू व क़रीब 1% शराब का सेवन करती हैं ।हरियाणा के महाविधालयों और विश्वविद्यालयों में निरंतर तंबाकू मुक्त कैंपस बनाने का प्रयास जारी है । महिलाओं और किशोरियों में बढ़ रही नशे की प्रवृति इसलिए भी चिंताजनक है कि भारतीय समाज में हमेशा ही महिलाओं का दर्जा ऊँचा रहा है, उन्हें देवी रूप समझा जाता है ।उन्होंने कहा कि तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों का महिलाओं पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव के कारण तनाव, चिंता, अवसाद और निर्भरता की ओर ले जाता है, हार्मोनल असंतुलन भी बढ़ सकता है, आत्मविश्वास में कमी, सामाजिक अलगाव, अपराधबोध और शर्मिंदगी की भावना बढ़ती है । शुरुआती दौर में लगता है मादक द्रव्यों का सेवन तनाव मुक्त करता है लेकिन समय के साथ निर्भरता और अंततः लत बन जाता है । ग़ौर करें तो महिलाएं स्वतंत्रता की इच्छाशक्ति, स्टेटस सिंबल और तुलनात्मक दृष्टिकोण के चक्कर में धूम्रपान करने लगती हैं । तनाव प्रबंधन के लिए भावनाओं को समझना ज़रूरी है कि कैसे किन कारणों से उत्पन्न हो रही हैं, उन्हें समझकर स्वीकार करें तत्पश्चात अपनी नकारात्मक सोच को सकारात्मक विचारों में बदलें और रचनात्मक कार्यों में अपनी व्यस्तता बढ़ाएं । तनाव प्रबंधन के प्रभावी तरीके हो सकते हैं - स्वस्थ जीवनशैली, संगीत, बाग़वानी, मनपसंद किताबों का अध्ययन, रचनात्मक शौक़ व कार्य गतिविधि, नशे से दूरी, माइंडफुलनेस, प्रकृति की गोद, वास्तविकता की स्वीकृति, सामाजिक जुड़ाव, लक्ष्य निर्धारण, सकारात्मक सोच, आशावादी नजरिया और लाइक माइंडेड भरोसेमंद दोस्तों का साथ नशे से दूर रखने में मददगार सिद्ध होते हैं । कार्यक्रम में पहुँचे परामर्शदाता नीरज कुमार ने कहा कि जब किसी भी विषय पर इंसान की निर्भरता बढ़ने लगे तो सावधानी ज़रूरी है । ऐसे समय पर मन की समझ और जागरूकता मददगार होती है । कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय इन्चार्ज बबीता पवार व सहायक प्रोफ़ेसर रविन्द्र ने कहा कि निस्संदेह मनोवैज्ञानिक तकनीक का प्रेरणादायी उपयोग उत्साह बढ़ाने व मन की आंखें खोलने वाला रहा । अगर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर हो तो नि:संदेह सकारात्मक बदलाव संभव है । कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति राज्य बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्य नीरज कुमार, सहायक प्रोफेसर सुरक्षा, सहायक प्रोफेसर रमेश, सहायक प्रोफेसर रजत, सहायक प्रोफेसर ग्रीन की रही ।
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