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Seminar on Safety and Precautions against stray dogs


Posted on 17/12/2025

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 07.11.2025 को सुओ मोटो रिट याचिका (सिविल) सं. 5/2025 “City Hounded by Strays, Kids Pay Price” में शैक्षणिक संस्थानों के लिए पारित निर्देशों के आलोक में महर्षि जमदग्नि राजकीय कन्या महाविद्यालय, पिल्लू खेड़ा (जींद) में दिनांक 17.12.2025 को छात्राओं हेतु “आवारा कुत्तों से सुरक्षा एवं सावधानियाँ” विषय पर एक जागरूकता व्याख्यान/सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं एवं सभी कर्मचारियों में सुरक्षा–सम्बन्धी चेतना, उत्तरदायित्व–बोध तथा आपातस्थिति में समुचित आचरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। इस व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में अंग्रेजी विषय के प्राध्यापक श्री दीपक कुमार ने अपने विचार व्यक्त किए। इस सेमिनार में महाविद्यालय की छात्राओं सहित महाविद्यालय के कर्मचारियों की सार्थक उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम का वातावरण गंभीर एवं सारगर्भित बना रहा। अपने उद्बोधन में श्री दीपक कुमार ने छात्राओं को विस्तारपूर्वक अवगत कराया कि महाविद्यालय परिसर अथवा उसके आस–पास विचरण करने वाले आवारा कुत्तों के प्रति संयमित एवं सुरक्षित आचरण अपनाना क्यों आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुत्तों को दुलारने, छूने, उनके समीप अनावश्यक रूप से जाने, उन्हें भोजन कराने, पत्थर अथवा अन्य वस्तु से उकसाने अथवा उन पर आक्रामक व्यवहार करने से पूर्णतः विरत रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा आचरण प्रायः कुत्तों को उतेजित कर देता है और हमले की आशंका बढ़ा देता है। विद्यार्थियों को यह भी परामर्श दिया गया कि यदि किसी स्थिति में कुत्ता निकट आ जाए तो भागने या चीखने–चिल्लाने के स्थान पर धैर्य रखते हुए धीरे–धीरे एक ओर हटकर सुरक्षित स्थान की ओर अग्रसर हों तथा तुरन्त घटना की सूचना महाविद्यालय प्रशासन को दें। व्याख्यान के अगले खंड में कुत्ते के काटने अथवा नाखून/दाँत से खरोंच लगने की दशा में अपनाए जाने वाले तत्काल चिकित्सकीय कदमों पर विशेष बल दिया गया। छात्राओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के संदर्भ में समझाया गया कि किसी भी dog‑bite को साधारण चोट न मानते हुए इसे चिकित्सा–आपातस्थिति समझा जाना चाहिए; ऐसे में घाव को तुरंत प्रचुर मात्रा में स्वच्छ पानी एवं साबुन से कम से कम 10–15 मिनट तक धोना, रक्तस्राव की दशा में स्वच्छ पट्टी से हल्का दबाव देना तथा बिना किसी प्रकार की विलम्ब–वृत्ति के निकटतम सरकारी अस्पताल/स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर एंटी–रेबीज़ टीके एवं आवश्यक उपचार प्राप्त करना अनिवार्य है। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को यह भी सूचित किया गया कि महाविद्यालय स्तर पर प्राथमिक उपचार की मूलभूत सामग्री उपलब्ध रखी गई है, जिससे किसी आकस्मिक घटना की स्थिति में घाव की त्वरित सफाई एवं प्रारम्भिक ड्रेसिंग की जा सके। साथ ही यह व्यवस्था की गई है कि किसी भी dog‑bite या संदिग्ध घटना की स्थिति में छात्रा तत्काल महाविद्यालय कार्यालय को सूचित करे, ताकि समय रहते स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर समुचित चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित की जा सके। समापन खंड में श्री दीपक कुमार ने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से भी इन सुरक्षा–निर्देशों का पालन करें तथा अपनी सहपाठिनियों को भी सजग एवं जागरूक बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ, ताकि महाविद्यालय परिसर एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं उत्तरदायी शैक्षणिक वातावरण के रूप में विकसित हो सके। महाविद्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. देवेन्द्र (सहायक प्राध्यापक अर्थशास्त्र) ने व्याख्यान के अंत में यह अपेक्षा व्यक्त की कि छात्राएँ माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा के निर्देशों की भावना के अनुरूप अपने आचरण में सतर्कता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व को प्रमुखता दें। यह जागरूकता व्याख्यान/सेमिनार सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ और छात्राओं में आवारा कुत्तों से उत्पन्न जोखिम, उनसे संबंधित सावधानियों तथा dog‑bite के उपरांत आवश्यक चिकित्सकीय उपायों के प्रति गहन समझ एवं व्यावहारिक संवेदनशीलता विकसित करने में प्रभावी सिद्ध हुआ।